जल्द ही मंगल ग्रह पर भी पृथ्वी की तरह मक्खियां भिन भिनाएंगी।
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने मंगल का अध्ययन करने के लिए इस अनोखे प्रोजेक्ट को हरीझंडी दिखाई है जिसमें रोबोट मक्खियों का झुंड मंगल के हर हिस्से में जीवन के साक्ष्य ढूंढेगा मार्सबीज नाम की यह मक्खियां सामान्य मक्खी के आकार की ही होगी, बस इनके पंख विशालकाय होंगे जिससे ये मंगल के हल्के वायुमंडल में उड़ सकें।मंगल का वायुमंडल पृथ्वी की तुलना में सौ गुना कम घना है। इसलिए इन मक्खियों के पंख विशाल आकार के बनाए गए हैं ताकि ये आसानी से उड़ सके। अमेरिका और चीन के वैज्ञानिकों की बनाई इन मक्खियों में सेसर और वायरलेस कम्युनिकेशन उपकरण
लगे होंगेजिससे वे किसी भी भूभाग का मानचित्र बना सकें, वहां से नमूने ले सकें या फिर मीथेन उत्सर्जन जैसे जीवन के साक्ष्य ढूंढ सकें। मंगल ग्रह का अध्ययन करने के लिए नासा ने वहां रोवर भेजे हैं, हालांकि उनकी रफ्तार बेहद कम है। 2012 में मंगल पर उतरने के बाद नासा के क्यूरियोसिटी रोवर सिर्फ 18 किमी चला है।मार्सेबीज की रफ्तार तेज होगी। रोबोट मधुमक्खियां मंगल पर मौजूद रोवरों के संचालन केंद्र से जुड़ी रहेंगी। उनकी बैटरी खत्म हो जाने पर वे यहीं आकर खुद को रिचार्ज करेंगी माफ़बीज प्रोजेक्ट को नासा ने इनोवेटिव एडवांस्ड कॉन्सेप्टस स्कीम के तहत आए 230 प्रस्तावों में से है। इसके अलावा 24 अन्य प्रोजेक्ट पर भी काम शुरू I जिन संस्थानों के प्रस्तावों को चुना गया उन सबको नासा ने 125 लाख डॉलर की फंडिग दी है जिससे वे आगे की रिसर्च कर सकें। यह भाप से संचालित रोबोट है जो शनि के चंद्रमा टाइटन के बफले समुद्र की जांच पड़ताल करने में सक्षम होगा। यह चिड़िया की तरह खुदक फुदक कर मंगल की सतह से नमूने एकत्र करेगा और फुदक कर रोवर तक लौट आएगा।यह तब काम आएगा जब अध्ययन करने वाली टीमों को मंगल के किसी क्षेत्र के भूभाग की जानकारी नहीं होगी। यह रोबोट स्थान के हिसाब से अपना आकार बदल लेगा। यह वातावरण में उड़ने समतल मैदान पर लटकने तालाबों में तैरना और गहरी गुफाओं का अध्ययन करने में सक्षम होगा,यह कोबाट नामक छोटे छोटे रोबोट से बना होगा जो बड़े रोबोट से अलग होकर स्वतंत्र रूप से कम करेगा । काम पूरा होते ही वह बड़े रोबॉट के पास पहुच कर जुड़ जाएगा ।