Top 5 mysterious places in india, भारत के 5 रहस्यमय जगह ?

Top 5 mysterious places in india, भारत के 5 रहस्यमय जगह ?




सोने की चिड़िया कहे जाने वाली, भारत को एक रहस्यमय और तंत्र-मंत्र वाला देश भी माना जाता है। हिंदू कुश पर्वत माला से लेकर अरुणाचल तक और कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक देश में कई रहस्य दफन है। समय के साथ-साथ भारत विज्ञान और तकनीक में भी विकसित होता चला गया। लेकिन भारत में आज भी कई ऐसी जगह है जो अपने दामन में कई रहस्यों को समेटे हुए हैं। जिनके बारे में आप नहीं जानते होंगे। आज आपको परिचित करवाते हैं देश के कुछ रहस्य और रोमांच स्थानों से।

अजंता एलोरा की गुफाएं

भारत में गुफाएं बहुत है,लेकिन अजंता एलोरा की गुफाओं के बारे में वैज्ञानिक कहते हैं। कि यह गुफाएं किसी एलियंस के समूह द्वारा बनाई गयी है।
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यहां पर एक विशालकाय कैलाश मंदिर है। arcologist के अनुसार कम से कम 4000 वर्ष पूर्व बनाया गया था। 40,00,000 लाख टन की चट्टानों से बनाए गए इस मंदिर को कौन से तकनीक से बनाया गया होगा। आज भी रहस्य बना है। 4000 वर्ष पूर्व तो क्या आज की आधुनिक इंजीनियरिंग के जरिए अजन्ता एलोरा गुफा का निर्माण नहीं किया जा सकता माना जाता है,कि एलोरा की गुफाओं के अंदर नीचे सीक्रेट शहर बसा हुआ है।


कमरूनाग झील
हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियों के बीच एक ऐसी झील स्थित है। जहां लाखों करोड़ों नहीं बल्कि अधिक मूल्य का खजाना मौजूद है। झील में हर साल खजाना बढ़ता चला जाता है।
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जिसमें लाखों रुपए ऊपर से देखे जा सकते हैं। यह झील मंडी जिले से करीब 60 किलोमीटर दूरी पर है। कमरूनाग झील के नाम से जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भक्त झील में सोने चांदी के गहने डालते हैं। सदियों से चली आ रही परंपरा के आधार पर माना जाता है, कि झील के गर्भ में अरबों का खजाना दवा है। गर्मी के मौसम में तो चांदी के जेवर साफ नजर आते हैं। मान्यता है कि जो दिल से मानते है,और सोना चांदी चढ़ाते है। और उनकी मन्नत पूरी होती है। इसी कारण लोग श्रद्धा से अपने शरीर का कोई गहना चढ़ा देते हैं। यह सोना चांदी कभी भी झील से निकाला नहीं जाता है, क्योंकि लोग इसे ईश्वर के खजाने के रूप में जानते है। कोई भी खजाने को चुरा नहीं सकता क्योंकि माना जाता है। कि कमरूनाग के खामोश प्रहरी इसकी रक्षा करते हैं।



वृंदावन का रंग महल
उत्तर प्रदेश के वृंदावन में स्थित यह मंदिर आज भी अपने आप में कई रहस्य समेटे हुए हैं। माना जाता है, कि यहां आज भी हर रात कृष्ण गोपियों संग रास रचाते हैं। यही कारण है कि सुबह खुलने वाले निधिवन को शाम की आरती बाद बंद कर दिया जाता है। उसके बाद वहां पर आना जाना मना हो जाता है। यहां तक कि दिन में रहने वाले पशु पक्षी भी शाम होते होते निधिवन को छोड़कर चले जाते हैं। कहा जाता है,कि यदि कोई छुपकर रासलीला देखने की कोशिश करता है तो पागल हो जाता है। निधिवन के अंदर ही रंग महल मौजूद है। मान्यता है कि रोजाना रात में रासलीला के बाद राधा कृष्ण यही पर विश्राम करते हैं। रंग महल में रखी चंदन के पलंग को राधा और कन्हैया के लिए शाम को 7:00 बजे से पहले सजा दिया जाता है। पलंग के बगल में एक लोटा पानी राधा जी की श्रृंगार का सामान दातुन और पान रख दिया जाता है इसके बाद रंग महल के दरवाजे पर ताला लगा दिया जाता है। सुबह 5:00 बजे जब रंग महल का दरवाजा खोलते हैं, तो बिस्तर अस्त-व्यस्त पड़े होते है। लोटे का पानी खाली और पान खाया हुआ मिलता है। निधिवन के पेड़ भी बड़े अजीब है,जहां एक और हर पेड़ की शाखाएं ऊपर की ओर पड़ती है वहीं जीवन के पेड़ों की शार्क नीचे की ओर पड़ती है। और वहां जाने के लिए  रास्ता बनाने के लिए पेड़ों को डंडो के सहारे रोका गया है।



रूपकुंड झील
कंकाल झील के नाम से मशहूर इस झील को रहस्यमई झील के रूप में जाना जाता है। रूपकुंड झील हिमालय पर लगभग 5029 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। अगर आप यहां पर जाते हैं, तो इस दिव्य कुंड की गहराई और चारों और बिखरे नर कंकाल मन में कौतूहल जिज्ञासा उत्पन्न कर देते हैं। रूपकुंड के रहस्य का प्रमुख कारण ही नर कंकाल ही तो है जो न केवल इसके इर्द-गिर्द देखते हैं। बल्कि तालाब में इनकी परछाइयां भी दिखाई देती है। नर कंकाल को लेकर क्षेत्रवासियों में अनेक प्रकार की किवदंत प्रचलित है। वर्षों से इतिहासकार इन कंकालों के रहस्य का पता लगाने में जुटे हैं। लेकिन अब तक तो कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है। इन कंकाल को सबसे पहले साल 1942 में देखा गया।


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