हवाई जहाज़ के गुज़रने के बाद, सफेद सी लकीर क्या होती है, बहुत कम लोग जानते है ?

हवाई जहाज़ के गुज़रने के बाद, सफेद सी लकीर क्या होती है, बहुत कम लोग जानते है ?

क्या आपने कभी स्पष्ट नीले आकाश में एक हवाई जहाज या रॉकेट को उड़ते देखा है?
हवाई जहाज़ के गुज़रने के बाद, सफेद सी लकीर क्या होती है, बहुत कम लोग जानते है ?
हवाई जहाज़ के गुज़रने के बाद, सफेद सी लकीर क्या होती है, बहुत कम लोग जानते है ?


रॉकेट के गुज़रने के बाद वो आसमान की बनी सफ़ेद लकीर को हम बचपन में तो बड़े आश्चर्य से देखते थे. कोई उसे रॉकेट का धुआं मानता था, तो कोई बर्फ़ की लकीर, क्योंकि यह आकाश में एक सफेद लकीर को पीछे छोड़ देता है। पर ​हम में से शायद अब भी कोई जानता हो कि वो असलियत में होती क्या है।तो आइये इसके बारे में जानते है।

जो सफेद लकीरें हैं वे वास्तव में कृत्रिम बादल हैं। वे कांट्रेल्ज़ (contrails) कहलाते हैं, जो “ कॉंडेन्सेशन ट्रेल (condensation trail)" वाक्यांश का एक छोटा संस्करण है। हवाई जहाज के इंजन धुएं का उत्पादन करते हैं, जैसे कार इंजन करते हैं। जब गर्म धुआँ एक विमान से निकलता हैं तब धुएं में जल वाष्प, हवा से टकराती है। 26,000 फीट या उससे अधिक की ऊंचाई पर, हवा बेहद ठंडी होती है (कभी-कभी -40 ° F से भी अधिक!)। ठंडी हवा जल वाष्प को संघनित (Condensed) करती है।

इसका मतलब यह है कि जल वाष्प गैसें छोटी पानी की बूंदों में बदल जाती हैं या यहां तक ​​कि अंत में वाष्पीकरण से पहले छोटे बर्फ के क्रिस्टल में जम जाती हैं। यह संघनित जल वाष्प और बर्फ के क्रिस्टल के मिश्रण से आकाश में आपके द्वारा देखे जाने वाले बादल जैसे निशान बन जाते हैं।

कांट्रेल्ज़ (Contrails) तेज़ हवा की वजह से अपनी जगह से खिसक भी जाती है, ज़रूरी नहीं है कि वो वहीं दिखे जहां से जहाज़ गुज़रा था.

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